विजयदशमी पर नागा संन्यासियों ने किया शस्त्र पूजन, परंपरा के जरिए दिया धर्म रक्षा का संदेश”
विजयदशमी के पावन पर्व पर संपूर्ण उत्तराखंड समेत देशभर में सनातन धर्मावलंबियों ने हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ पर्व मनाया। भारत की प्राचीन परंपरा रही है कि जब भी राष्ट्र पर कोई संकट आया, तब धर्म और सत्य की रक्षा के लिए शास्त्रों और शस्त्रों का सहारा लिया गया। इसी परंपरा के अंतर्गत महानिर्वाणी अखाड़े के नागा संन्यासियों द्वारा शस्त्र पूजन किया जाता है। मान्यता है कि यह केवल पूजा नहीं, बल्कि धर्म और न्याय की रक्षा का संकल्प भी है, जो समाज को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ने का कार्य करता है। दशहरे पर्व पर संन्यासियों द्वारा किया जाने वाला यह अनुष्ठान शक्ति और भक्ति दोनों का संगम माना जाता है।
संन्यासियों का कहना है कि जब-जब देश, धर्म, मातृभूमि और मातृशक्ति की अस्मिता पर सवाल खड़े हुए, तब नागा साधु बिना भय के रणभूमि में उतरे और अपने प्राणों की आहुति देकर धर्म और राष्ट्र की रक्षा की। शस्त्र पूजन इसी त्याग औरy पराक्रम की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। संन्यासियों ने बताया कि यह अनुष्ठान भावी पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि धर्म की रक्षा करना सर्वोपरि कर्तव्य है। दशहरे पर शस्त्रों की पूजा केवल सांकेतिक नहीं, बल्कि यह संकल्प है कि जब भी समय आएगा, सनातन धर्म के अनुयायी अन्याय और अधर्म के विरुद्ध खड़े होकर राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा करेंगे।
बाइट – रवींद्र पुरी, महामंडलेश्वर महानिर्वाणी अखाड़ा